Friday, 5 June 2020

गाता रहुंगा

हम आये थे अकेले यहाँ
नाहीं सुख थे, ना कोई दुःख
तमन्ना थी, दिल मे सुरोंकी
और कुछ अरमान थे

एक दीन सवेरा हुअा
और जाने क्यो, अंधेरा छां गया
जब हमने पढे कुछ लफ्ज
अस्पताल की, कागाजोंपे लिखे हूए

उसके बाद जैसे
जिंदगी ही बदल गयी
हर पखवाड दो थैली खून
ही मेरी जिंदगी बन गयी

हर बूँद खून था आपके लिये
मेरे लिये तो नयी उम्मीद  थी
सूर था ईश्वर मेरा
साधना उसकी साया थी

इस सूर के विश्व मै
मेरी आखरी सांस तक गाता रहुंगा
आपने दिया हुअा हर एक बूँद
आपको पेशे खिदमत करता रहुंगा


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