ए दोस्त तुम्हे पहचान
रही हू
या खुदसे ही मुलाकात
हो रही है पता नही
दोस्ती तो कुछ दिन की है
पर एहसास बहोत पुराना
क्यो है पता नाही
वक्त गुजर जाता है
हम भी बदल जाते है
पर कुछ बाते नही बदलती
क्यो पता नही
यहा अपने तो बहुत है
पर तुम्हारी बात कुछ अलग है
एैसा क्यो पता नही
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