Tuesday, 9 June 2020

मंजिल

मंजिल का पता नहीं
मगर सफर की आंस है
रिष्ते बेनाम सही
पर एहसास तो खास है

पहले भी मिले थे हम खुद से
आज अलग मुलाकात है
साथ तूम्हारा हमसफर
कुछ सुफियाना अंदाज है

कहने के लिये तो
सब कुछ ही पास है
मगर जाने क्यो
अधुरा एहसास है

तुम ना हो के भी हो
राबता ये खास है
तनहा होके भी हम ना अकेले
तुम्हारी इनायत ही कुछ खास है

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