मंजिल का पता नहीं
मगर सफर की आंस है
रिष्ते बेनाम सही
पर एहसास तो खास है
पहले भी मिले थे हम खुद से
आज अलग मुलाकात है
साथ तूम्हारा हमसफर
कुछ सुफियाना अंदाज है
कहने के लिये तो
सब कुछ ही पास है
मगर जाने क्यो
अधुरा एहसास है
तुम ना हो के भी हो
राबता ये खास है
तनहा होके भी हम ना अकेले
तुम्हारी इनायत ही कुछ खास है
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