Friday, 5 June 2020

कुछ बाते....

कुछ बाते हम बोल न पाये
कुछ रिष्ते हम निभा ना पाये
अनकही सी कुछ खामोशीया
हम भुला ना पाये

वो पल, क्या थे जो गुजर गये
जीन को हम रुखा ना पाये
वो पलो की गहाऱयीया
हम भुला ना पाये

दिलं तो हमारा भी दुःखी था
पर हमदर्द हम तुम्हारे हो न पाये
एक सहारा ही मांगा जो आपने
वो भी हम दिला न पाये

अनकही सी कुछ खामोशीया
हम भुला ना पाये

घांव जो गहरे थे दिलपे तुम्हारे
वह जख्म हम समझ ना पाये
प्यार का मरहम जो चाहा था तुमने
वो भी हम लगा न पाये

अनकही सी कुछ खामोशीया
हम भुला ना पाये

उलझ गये है रिश्तो के धागे
हम जिन्हे सुलझा न पाये
कुछ दर्द तुम्हारे, कुछ थे हमारे
जिन को हम बोल ना पाये

आपने जो नाम से पुकारा हमे
पल पराये हो गये सारे
हम गलत थे, पर थे तो तुम्हारे
ये शिकायत भी आपसे
हम कर ना पाये

अनकही सी कुछ खामोशीया
हम भुला ना पाये

क्या कहू ए दोस्त...
कुछ रिष्ते हम निभा ना पाये

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