आज सडक पे एक काला घोडा देखा
उमदा , काला राजस जांनवर
ऐसा लगा किसी राजा के साथ
निकल पडेगा सवारी पे
कैसा निकलेगा अभागी वो
जो बंधा हुअा था एक गाडी से
गाडी मे थी खूप सारी अंगुठीया
कुछ बडी कुछ छोटी कुछ नक्कासी वाली
उसका मालिक चिल्ला रहा था
ले लो ले लो......
काले घोडे की नाल की अंगुंठीया
आपके हर सवाल का जवाब देगी
धंदेमे बरकत आयेगी, आपका प्रेम पाओगे
ले लो ले लो......
काले घोडे की नाल की अंगुठिया
लोग तो जैसे टूट पडे थे
अपनी अपनी किस्मत सवारनेमे लगे थे
हर कोई इस उम्मिद मे था अब तो सब ठीक होगा
मालिक तो खूश था जैसे जैसे अंगुठीयोंका ढेर
कम हो जा रहा था
इन सबमे वो काला घोडा कहा था
उस बिचारे की तो ये भी नहीं पता था
की काला रंग होता कैसे है
वो तो खो गया था अपनी ही खयालोंमे
औ र हो गया था लुप्त उसकी ही नाल की
अंगुठियो मे.......
Khupach chhan !!
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